Jo Nahi Ho Sake Purn Kaam Mai Unko Krta Hu Pranaam, Nagaarjun Kavita Sangrah

उनको प्रणाम (नागार्जुन/कविता संग्रह) जो नहीं हो सके पूर्ण–काम मैं उनको करता हूँ प्रणाम । कुछ कंठित औ’ कुछ लक्ष्य–भ्रष्ट जिनके अभिमंत्रित तीर हुए; रण की समाप्ति के पहले ही जो वीर रिक्त तूणीर हुए ! उनको प्रणाम ! जो छोटी–सी नैया लेकर उतरे करने को उदधि–पार; मन की मन में ही रही¸ स्वयं हो गए उसी … Read more

Sach Na Bolna , Kavi Nagaarjun Hindi Kavita Sangrah, poems

सच न बोलना(कवी नागार्जुन /कविता संग्रह) मलाबार के खेतिहरों को अन्न चाहिए खाने को, डंडपाणि को लठ्ठ चाहिए बिगड़ी बात बनाने को! जंगल में जाकर देखा, नहीं एक भी बांस दिखा! सभी कट गए सुना, देश को पुलिस रही सबक सिखा! जन-गण-मन अधिनायक जय हो, प्रजा विचित्र तुम्हारी है भूख-भूख चिल्लाने वाली अशुभ अमंगलकारी है! … Read more

Aaye Din Bahaar Ke, Hindi Kavita Sangrah

आए दिन बहार के (कवि नागार्जुन/कविता संग्रह) ‘स्वेत-स्याम-रतनार’ अँखिया निहार के सिण्डकेटी प्रभुओं की पग-धूर झार के लौटे हैं दिल्ली से कल टिकट मार के खिले हैं दाँत ज्यों दाने अनार के आए दिन बहार के ! बन गया निजी काम- दिलाएंगे और अन्न दान के, उधार के टल गये संकट यू.पी.-बिहार के लौटे टिकट मार … Read more

Saty Ko Lakwaa Maar Gya Nagaarjun Kavita Sangrah, Kavita

सत्य को लकवा मार गया है(सत्य/नागार्जुन कविता संग्रह) सत्य को लकवा मार गया है वह लंबे काठ की तरह पड़ा रहता है सारा दिन, सारी रात वह फटी–फटी आँखों से टुकुर–टुकुर ताकता रहता है सारा दिन, सारी रात कोई भी सामने से आए–जाए सत्य की सूनी निगाहों में जरा भी फर्क नहीं पड़ता पथराई नज़रों … Read more

Mor Na Hoga …Ulloo Honge, Ek Vyaangayaatmak Kavita / Naagaarjun

मोर ना होगा……. उल्लू होंगे, एक व्यांगयात्मक कविता ख़ूब तनी हो, ख़ूब अड़ी हो, ख़ूब लड़ी हो प्रजातंत्र को कौन पूछता, तुम्हीं बड़ी हो डर के मारे न्यायपालिका काँप गई है वो बेचारी अगली गति-विधि भाँप गई है देश बड़ा है, लोकतंत्र है सिक्का खोटा तुम्हीं बड़ी हो, संविधान है तुम से छोटा तुम से … Read more

Bhul Jao Purane Sapne Ko (कविता), कवि नागार्जुन, Hindi Poem

भूल जाओ पुराने सपने को(कविता) कवि नागार्जुन सियासत में न अड़ाओ अपनी ये काँपती टाँगें हाँ, मह्राज, राजनीतिक फतवेवाजी से अलग ही रक्खो अपने को माला तो है ही तुम्हारे पास नाम-वाम जपने को भूल जाओ पुराने सपने को न रह जाए, तो- राजघाट पहुँच जाओ बापू की समाधि से जरा दूर हरी दूब पर … Read more

सृष्टि(Srishti) – Sumitranandan Pant (सुमित्रानंदन पंत)

सृष्टि(Srishti) – Sumitranandan Pant (सुमित्रानंदन पंत) [ads1] [ads2] मिट्टी का गहरा अंधकार, डूबा है उस में एक बीज वह खो न गया, मिट्टी न बना कोदों, सरसों से शुद्र चीज! उस छोटे उर में छुपे हुए हैं डाल–पात औ’ स्कन्ध–मूल गहरी हरीतिमा की संसृति बहु रूप–रंग, फल और फूल! वह है मुट्ठी में बंद किये … Read more

मैं सबसे छोटी होऊं – Sumitranandan Pant (सुमित्रानंदन पंत)

मैं सबसे छोटी होऊँ तेरी गोदी में सोऊँ तेरा आँचल पकड़-पकड़कर फिरू सदा माँ तेरे साथ कभी न छोड़ूँ तेरा हाथ बड़ा बनाकर पहले हमको तू पीछे छलती है माँ हाथ पकड़ फिर सदा हमारे साथ नहीं फिरती दिन-रात अपने कर से खिला, धुला मुख धूल पोंछ, सज्जित कर गात थमा खिलौने, नहीं सुनाती हमें … Read more

15 अगस्त 1947 – Sumitranandan Pant (सुमित्रानंदन पंत)

15 August 1947 – Sumitranandan Pant

15 August 1947 By Sumitranandan Pant 15 अगस्त 1947 – Sumitranandan Pant (सुमित्रानंदन पंत) चिर प्रणम्य यह पुष्य अहन, जय गाओ सुरगण, आज अवतरित हुई चेतना भू पर नूतन! नव भारत, फिर चीर युगों का तिमिर-आवरण, तरुण अरुण-सा उदित हुआ परिदीप्त कर भुवन! सभ्य हुआ अब विश्व, सभ्य धरणी का जीवन, आज खुले भारत के … Read more

One Of The Best Bollywood Shayari | Heart Touching Line

[highlight color=”black”]Bollywood Shayari, Movie Jab Tak Hai Jaan[/highlight] ♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥ Teri Aankhon Ki Namkeen Mastiyan Teri Hansi Ki Be Parwaah Gustakhiyan Teri Zulfon Ki Lehrati Angdaiyaan Nahi Bhoolunga Main Jab Tak Hai Jaan, Jab Tak Hai Jaan Tera Haath Se Haath Chhodna Tera Saayon Ka Rukh Modna Tera Palat Ke Phir Na Dekhna Nahin Maaf Karoonga … Read more