Mor Na Hoga …Ulloo Honge, Ek Vyaangayaatmak Kavita / Naagaarjun

मोर ना होगा……. उल्लू होंगे, एक व्यांगयात्मक कविता ख़ूब तनी हो, ख़ूब अड़ी हो, ख़ूब लड़ी हो प्रजातंत्र को कौन पूछता, तुम्हीं बड़ी हो डर के मारे न्यायपालिका काँप गई है वो बेचारी अगली गति-विधि भाँप गई है देश बड़ा है, लोकतंत्र है सिक्का खोटा तुम्हीं बड़ी हो, संविधान है तुम से छोटा तुम से … Read more

Bhul Jao Purane Sapne Ko (कविता), कवि नागार्जुन, Hindi Poem

भूल जाओ पुराने सपने को(कविता) कवि नागार्जुन सियासत में न अड़ाओ अपनी ये काँपती टाँगें हाँ, मह्राज, राजनीतिक फतवेवाजी से अलग ही रक्खो अपने को माला तो है ही तुम्हारे पास नाम-वाम जपने को भूल जाओ पुराने सपने को न रह जाए, तो- राजघाट पहुँच जाओ बापू की समाधि से जरा दूर हरी दूब पर … Read more